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राष्ट्रीय चिंतन शिविर: इन संगठनों और पदाधिकारियों ​की मिली सहमति

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सैन समाज के राष्ट्रीय चिंतन शिविर की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। शिविर में सैन समाज के विभिन्न संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने शामिल होने की सहमति प्रदान की है।

राष्ट्रीय चिंतन शिविर यूपी के महरौनी जिला ललितपुर स्थित बडोनियॉं मैरिज गार्डन में आयोजित होगा। मंगलवार, 10 सितंबर 2019 को आयोजित होने वाले इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही है।

कार्यक्रम संयोजक कायर्क्रम आर्य रत्न शिक्षक लखन लाल आर्य ने बताया कि राकेश सैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष, सेन सविता एकता समिति, झाँसी, नंदकिशोर वर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय सैन समाज, इंदौर, रामचंद्र प्रधान पूर्व एमएलसी/पूर्व पीसीएफ चैयरमैन, लखनऊ, सैन सुरेंद्र बदलिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष,अखिल भारतीय सैन सविता समाज, दिल्ली, संतोष कुमार सविता, उप निदेशक, कृषि विभाग, ललितपुर, रविन्द्र सैन बाजवान, राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय सैन सभा, संपादक सैन दर्पण और पिछड़ा वर्ग एक परिवार, सोनीपत, अशोक चौहान, उद्योगपति, इंदौर चिंतन शिविर के मुख्य अतिथि होंगे। अध्यक्षता समाज सेवी मुन्नालाल ठेकेदार, झांसी करेंगे।

सैन समाज का यह सम्मेलन राजनीतिक दलों के लिये जानिये क्यों है महत्वपूर्ण

राजेंद्र कुमार श्रीवास, रिटायर्ड अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीमच, सरजीत सिंह खण्डसाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आजाद पार्टी अपनी जिंदगी अपना दल कौशाम्बी (गाजियाबाद) यूपी रिटायर्ड जॉइन्ट चीफ मार्केटिंग ऑफिसर उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड, राजेंद्र टॉक्सिया, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भाजपा युवा मोर्चा, राजस्थान, राजेश कुमार, सुल्तानपुर, जिला समाज कल्याण अधिकारी, रणवीर सिंह सैन, पूर्व सैनिक बागपत, दुर्लभजी गोंडलिया, रिटायर्ड सुप्रीम ऑफ पोस्ट ओफीसीज राजकोट, अनिल शर्मा, राष्ट्रीय महासचिव राष्ट्रीय नाई महासभा, मुंबई, संजय कुमार ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष, दिल्ली भारतीय नाई समाज, दिल्ली, मोहन लाल बी शर्मा, राष्ट्रीय महासचिव राष्ट्रीय सेन सभा/चैयरमैन अति पिछड़ा वर्ग मुंबई, सुभाष वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष भरतीय सेन समाज, इंदौर, महेंद्र सेन, टीटीआई प्रदेश अध्यक्ष, युवा सैन समाज झाँसी, अनिल श्रीवास्तव, प्रदेश उपाध्यक्ष राष्ट्रीय नाई महासभा बरेली, जगमोहन बडोनियाँ, अध्यक्ष मानवता के लिए एक कदम संस्था, झाँसी, गुलशन नंदा, मेरठ, विजय प्रताप शर्मा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राष्ट्रीय नाई महासभा वाराणसी, विनोद शर्मा नन्दवंशी, पूर्व अध्यक्ष वाराणसी सैन समाज, वी के शर्मा, प्रदेश महासचिव राष्ट्रीय नाई महासभा प्रयागराज, लखन लाल सविता, जिलाध्यक्ष बुन्देलखण्ड कल्याण समिति, ललितपुर यूपी, डॉ मनोज सैन, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, भारतीय सेन समाज, सहारनपुर, राकेश सहल एडवोकेट राष्ट्रीय अध्यक्ष अति पिछड़ा लोक मोर्चा सहारनपुर, डॉ कैलाश बिहारी ठाकुर, प्रधान सम्पादक हिंदी मासिक पत्रिका घर घर का भाई, भागलपुर, अतुल कुमार नंद, सीतापुर, बी.डी. बंसल पत्रकार, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सविता महासभा महोबा, राधेश्याम सविता, वरिष्ठ पत्रकार झींझक, कानपुर देहात, धर्मेंद्र यागिक, सीईओ कृषक चेतना प्रोड्यूशर कम्पनी, कानपुर, रामजी सैन, रामायणी, झाँसी शिविर के मुख्य वक्ता होंगे।

सैन समाज का यह सम्मेलन राजनीतिक दलों के लिये जानिये क्यों है महत्वपूर्ण

ये हैं विशेष आमंत्रित अतिथि

मीरा दीदी, अध्यक्ष, माधव मीरा सेवा संस्थान, रघु पिपलिया रोड तपोवन, उज्जैन
किरन सैन, भाजपा महिला जिलाध्यक्ष सतना(मध्यप्रदेश)
सरिता आर्या, प्रदेश महामंत्री महिला कांग्रेस गंजबासौदा मध्यप्रदेश
उषा सैन, समाजसेविका, झाँसी
किरन सैन, जिलाध्यक्ष भाजपा महिला मोर्चा ललितपुर
भारती सैन, राष्ट्रीय महासचिव आशा संघ, झाँसी
रघुवीर सिंह श्रीवास, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष भारतीय सैन समाज, भिंड, मध्यप्रदेश
भानु प्रताप सिंह, लखनऊ
रविन्द्र सैन राणा, दिल्ली राष्ट्रीय अध्यक्ष
डॉ. यतेंद्र कुमार सैन, प्रदेश अध्यक्ष, सैन सविता समाज बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश
राजेन्द्र सैन रज्जू , राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नाई महासभा, बीना
गोरेलाल सैन, प्रदेश अध्यक्ष, सर्व सैन समाज, टीकमगढ, मध्यप्रदेश
राजेश कुमार शर्मा, पूर्व अध्यक्ष छात्र संघ इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद
डॉ विनोद शर्मा, राष्ट्रीय महासचिव, जन नायक कर्पूरी ठाकुर सेवा समिति, जौनपुर
राजेश्वर सैन, प्रदेशाध्यक्ष, राष्ट्रीय नाई महासभा, सागर, मध्यप्रदेश
राजेश सत्यम सैन, हाथरस, उत्तर प्रदेश
सत्य नारायण सैन, शिक्षक, कोटा, राजस्थान
अशोक सैन, राधौगढ़, मध्यप्रदेश
सुन्दर सैन आर्य, हापुड़, उत्तर प्रदेश
ब्रह्मानन्द सैन, जिलाध्यक्ष, शिवपुरी, मध्यप्रदेश
देवीदयाल सैन, कुरुक्षेत्र, हरियाणा
सुरेश चंद्र ओमरे (एक्स आई.ए.एफ),
रमाकांत ठाकुर, पूर्व विधायक प्रत्याशी, आगरा
रामभज सेन, कुरुक्षेत्र, हरियाणा
के एल नापित, प्रदेश उपाध्यक्ष युवा सेन समाज मध्यप्रदेश छतरपुर
एम. एस. ठाकुर, सूरत (गुजरात)
शिवभजन सिंह सविता, रिडायर्ड सब इंस्पेक्टर यूपी पुलिस एवं जिलाध्यक्ष सविता महासभा, कानपुर
सुरेश श्रीवास आचार्य, CEO खुलासा न्यूज़ लाइव चैनल
डॉ अरुण कुमार सविता, प्रदेश अध्यक्ष सविता समाज कानपुर
पुरुषोत्तम सेन, वरिष्ठ समाजसेवी, कोटा, राजस्थान
राजेन्द्र प्रसाद ठाकुर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, जननायक कर्पूरी ठाकुर सेवा समिति, मुंबई, महाराष्ट्र
हीरालाल श्रीवास, राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा सेन समाज संगठन, भोपाल
प्रवीण सैन परमात्मा, प्रदेशाध्यक्ष युवा सैन समाज, सतना, मध्यप्रदेश
डी.एस. राजौरिया, प्रदेश अध्यक्ष, संयुक्त सेन समाज संगठन, ग्वालियर, भोपाल
संजय कुमार सविता, समाजसेवी, कालपी
किशोरीलाल सैन, झाँसी
जयकरण सैन, प्रदेश संगठन मंत्री युवा सर्व सेन समाज, मध्यप्रदेश
विनीत सराठे पार्थ, राष्ट्रीय कवि एवं एमपी स्टेट हेड, खुलासा न्यूज
विनोद सैन, ग्वालियर
पुष्पेंद्र सेन, ओरछा
दिनेश ठाकुर, मैनपुरी
रवि शंकर सैन, पत्रकार, ललितपुर
डॉ अंचल सैन, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य चिकित्सा प्रकोष्ठ भाजपा
बाबूलाल सैन बटुक, प्रांताध्यक्ष, मध्यप्रदेश सैन समाज, भोपाल
सुरेश सैन, राष्ट्रीय महासचिव, भारतीय सेन समाज
समय लाल सहगल, संस्थापक/संचालक मध्यप्रदेश सेन समाज, भोपाल
लक्ष्मण श्रीवास, युवा क्रन्तिकारी समाजसेवी, छत्तीसगढ़
नवल किशोर सैन, प्रदेश महामंत्री भरतीय सैन समाज, गुना, मध्यप्रदेश
प्रताप सिंह फिरोजपुरिया, पंजाब, सेन समाज अध्यक्ष
आर बी सैन, राष्ट्रीय महासचिव, नाई महासभा टीकमगढ
अशोक सैन, प्रदेशाध्यक्ष, विन्ध्य प्रदेश सैन समाज समिति, भोपाल
हरिशंकर नापित, शिक्षक एवं वरिष्ठ समाजसेवी, टीकमगढ
देवेंद्र नापित, समाजसेवी टीकमगढ
बृजबिहारी सैन, खानपुर, जिला झालावाड़, राजस्थान
सरदार सिंह सैन, विदिशा, मध्यप्रदेश
चौ. पवन भाई श्रीवास, प्रदेश अध्यक्ष, श्रीवास समाज संघ भिंड, मध्यप्रदेश
राजेंद्र सैन मावन, अशोकनगर गुना
राकेश सैन, पूर्व पार्षद नगर पंचायत नरवर, शिवपुरी
अमरजीत ठाकुर, जिला उपाध्यक्ष विश्व हिन्दु परिषद मोहम्मदपुर बलिया, उत्तर प्रदेश
डॉ आर.एस. सविता, समाजसेवी लहार, भिंड, मध्यप्रदेश
डॉ दिनेश सैन, राजगढ़ व्यावरा बाले (पीथमपुर सागौर इंदौर)
रमन श्रीवास्तव, एटा, यूपी
संजय कुमार श्रीवास्तव, समाजसेवी, मैनपुरी
त्रिलोक चन्द्र श्रीवास, प्रदेश अध्यक्ष सैन समाज, छत्तीसगढ़
कृपाल श्रीवास्तव, जिलाध्यक्ष सविता समाज कासगंज यूपी
योगेश श्रीवास्तव, नंदवंशी प्रदेश अध्यक्ष जननायक कर्पूरी ठाकुर सेवा समिति, बदायुं, उत्तर प्रदेश अजय श्रीवास्तव नंदवंशी, प्रदेश सचिव जननायक कर्पूरी ठाकुर सेवा समिति उत्तरप्रदेश
रविन्द्र श्रीवास्तव, पूर्व प्रधान, चंदौसी, जिला संभल, उत्तर प्रदेश
मनीष कुमार श्रीवास्तव, एडवोकेट, चंदौसी, जिला संभल, उत्तर प्रदेश
शैलेन्द्र श्रीवास, एडिटर-इन-चीफ, बसैया माँ न्यूज़ एवं जिलाअध्यक्ष मुरैना (म.प्र.) युवा सेन समाज संगठन
राधेश्याम सैन, भारतीय मजदूर संघ अध्यक्ष, उम्मेद मिल, पाली, राजस्थान
नारायण प्रसाद श्रीवास, अध्यक्ष सेन समाज, जबलपुर
मोहन लाल सैन, पटवारी, बीना, मध्यप्रदेश
संतोष कुमार सैन शिक्षक, ज्यौरा मौरा (टीकमगढ)
शिव चंद्र नंदन VNYS/ CMS/ADB आयुर्वेदा रसूलपुर दरियाव उन्नाव
एस के सविता नंदवंशी जिला मीडिया प्रभारी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया उन्नाव
दुर्गेश सविता यूथ जिलाध्यक्ष उन्नाव
शिव कुमार सविता, बांगरमऊ जिला उन्नाव, प्रदेशाध्यक्ष प्रगतिशील सविता सैन समाज वेलफेयर एसोशिएशन उत्तर प्रदेश
अनिल शर्मा, शुक्लागंज जिला उन्नाव प्रदेश महासचिव प्रगतिशील सविता सैन समाज वेलफेयर एसोशियेशन, उत्तर प्रदेश
संतोष सैन, प्रदेश अध्यक्ष सर्व समाज राजनांदगांव छत्तीसगढ़
रामबाबू श्रीवास, प्रदेश अध्यक्ष सैन महासभा मध्यप्रदेश एवं पूर्व पार्षद भिंड, ग्वालियर
दिलीप सविता, प्रदेश महासचिव, सविता समाज, उत्तर प्रदेश
जेपी आर्य, शिक्षक, उपाध्यक्ष, सविता समाज बांगरमऊ, उन्नाव
राकेश शर्मा, जौनपुर जिला कार्याध्यक्ष जननायक कर्पूरी ठाकुर सेवा समिति, जौनपुर
राकेश मालवीय, सेन प्रदेशाध्यक्ष मालवीय सैन समाज, मध्यप्रदेश
संतोष मालवीय सैन, प्रदेश उपाध्यक्ष मालवीय सैन समाज, मध्यप्रदेश
मुकेश मालवीय सैन, नसरूल्लागंज जिलाध्यक्ष, सीहोर
आशीष शर्मा, लखनऊ
आनंद वर्मा एडवोकेट हाई कोर्ट लखनऊ एवं प्रगतिशील सविता सैन समाज वेलफेयर एसोशियेशन, उत्तर प्रदेश
द्वारिका प्रसाद,कानपुर
राहुल सेन नंदवंशी, एडवोकेट, अयोध्या, उत्तर प्रदेश
शरद चंद सराठे, संयोजक सविता सहकार समिति एवं पूर्व अध्यक्ष सविता समाज भोपाल एवं भारतीय मजदूर संघ पेंशनर के राष्ट्रीय पदाधिकारी ,
विनोद माथुर, सह संयोजक, सविता सहकार समिति भोपाल एवं पूर्व अध्यक्ष सविता समाज भोपाल दयानंद चौक समाज आर्य समाज भोपाल के सदस्य एवं भारतीय मजदूर संघ बिजली कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारी,
सुरेश सोनपुरे, कार्यक्रम संयोजक, सविता सेवक सहकारी समिति व प्रचार मंत्री प्रचार मंत्री मध्य प्रदेश सेन सविता समाज भोपाल एवं विभिन्न संस्कृत गतिविधियों के संयोजक भेल भोपाल,
मंजू सराठे, युवा नेत्री भारतीय जनता पार्टी भोपाल एवं सामाजिक कार्यकर्ता सविता समाज एवं सदस्य सविता सहकार समिति भोपाल तथा मध्यप्रदेश शासन भोपाल द्वारा प्रथम बार घोषित ज्योतिबा फूले घोषित पुरस्कार से सतना में पुरस्कृत
चंद्रप्रकाश सराठे, संपादक सैन संदेश, भोपाल तथा अध्यक्ष सराठे समाज, भोपाल तथा संचालक श्री राधा कृष्ण सेन मंदिर, तलैया, भोपाल
गोपाल सराठे, वरिष्ठ समाजसेवी एवं मध्य प्रदेश सेन सविता समाज समाज भोपाल के कार्यकारिणी सदस्य
जीतू सैन, व्यवसायी/राजनेता टीकमगढ
ब्रजकिशोर टिंकू, हिंदुस्तान न्यूज़ 24
ओमनाथ मुंशी, उरई, जालौन
विनोद विक्रम सिंह, मण्डल अध्यक्ष सविता सेन महासभा, रामनगर उरई
जनपद -जालौन
प्रदीप कुमार यज्ञीक, उरई
जितेंद्र कुमार उरई
नरेश कुमार यागयिक उरई
कैलाश सैन, विश्व हिंदू परिषद जिला उपाध्यक्ष एवं भारतीय सेन समाज जिला अध्यक्ष शाजापुर मध्य प्रदेश
संतोष कुमार वर्मा, मऊरानीपुर, झांसी
रघुवीर शरण यागिक, जिला अध्यक्ष श्रीवास सेन महासभा, भिंड मध्यप्रदेश
चमन सैन, जिलाध्यक्ष भारतीय सैन समाज, गाजियाबाद, यूपी

कार्यक्रम के आयोजक

राजू सेन, अध्यक्ष सैन समाज महरौनी
गोपीलाल सैन आचार्य, महामंत्री सेन समाज, महरौनी
बृजेश सैन, शिक्षक
राम कुमार सैन
राजीव सैन, युवा अध्यक्ष, सैन समाज, महरौनी
जितेंद्र सैन शिक्षक, युवा मंत्री, सैन समाज महरौनी
बसंत सैन
रामस्वरूप सैन

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My Kuldevi

श्रीबाण माता को कुलदेवी के रूप में पूजते है ये परिवार

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श्री बाण माता का मुख्य मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है। ब्राह्मणी माता, बायण माता और बाणेश्वरी माता जी के नाम से भी जानते है। राजपूत, माली, नाई समेत कई समाज में विभिन्न गोत्रों के लोग माता को कुलदेवी के रूप में पूजते है।

जगदीश सैन

कुलदेवी श्री बाण माता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सोजत रोड़, पाली निवासी पीटीआई जगदीश सैन ने सैन इंडिया से शेयर की। उनके मुताबिक सैन समाज में कुछ परिवार ऐसे है जो बाण माता को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते है।

बाण माता का मुख्य मंदिर चित्तौड़गढ़ में विजय स्तंभ से थोड़ी दूरी स्थित कालिका मंदिर के नजदीक है। बाण माता के इस मंदिर के पास अन्नपूर्णा माता का मंदिर भी है। श्री बाण माताजी के मंदिर राजस्थान, गुजरात, उत्तरप्रदेश, उत्तरांचल आदि में भी स्थित है।

बाणमाता मेवाड के सूर्यवंशी गहलोत सिसोदिया (राजपूत) राजवंश की कुलदेवी है। सैन समाज में गहलोत गौत्र के कई परिवार भी उन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं।

मान्यता के अनुसार, बाण माताजी का पुराना स्थान गुजरात में गिरनार में था। कालान्तर में वे चित्तौड़ पधारी थी। इसके पीछे एक कथा है। वर्षो पूर्व चित्तौड़ के महाराणा ने गुजरात पर आक्रमण कर गुजरात को जीत लिया। बाद में वहां राजा ने अपनी बेटी का विवाह महाराणा से कर दिया। राजकुमारी बाण माता की अनन्य भक्त थी। विवाह के बाद माँ बाण माता भी राजकुमारी के साथ चित्तौड़गढ़ पधार गयी। गिरनार में आज भी माता का प्राचीन मंदिर है।

” बाण तू ही ब्रह्माणी , बायण सु विख्यात ।

सुर संत सुमरे सदा , सिसोदिया कुल मात ।।”

बाण माता की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार हजारों साल पहले बाणासुर नाम का राक्षस था। बाणासुर भगवान शिव का अनन्य भक्त था। शिवजी के आशीर्वाद से उसे हजारों भुजाओं की शक्ति प्राप्त थी। शिवजी ने उससे और भी कुछ मांगने को कहा तो बाणासुर ने कहा की आप मेरे किले के पहरेदार बन जाओ।

यह सुन शिवजी को बडी ही ग्लानि और अपमान महसूस हुआ लेकिन, उन्होंने उसको वरदान दे दिया और उसके किले के रक्षक बन गए। बाणासुर परम बलशाली होकर सम्पूर्ण भारत और पृथ्वी पर राज करने लगा और उससे सभी राजा और कुछ देवता तक भयभीत रहने लगे। एक दिन बाणासुर को शिवजी से युद्ध करने की सनक चढ़ गई। शिवजी ने काफी समझाया लेकिन वह नहीं माना। उसने शिवजी से एक और वर प्राप्त था कि वे कृष्ण से युद्ध में उसका साथ देंगे और उसके प्राणों की रक्षा करेंगे।

समय बीतता गया और श्री कृष्ण ने द्वारिका बसा ली थी। उधर बाणासुर के एक पुत्री थी जिसका नाम उषा था। बाणासुर ने उषा का विवाह किसी तुच्छ राजकुमार से नहीं हो जाये, इसलिये किले में नजरबंद कर दिया। इधर, उषा को स्वप्न में दिखाई दिए एक युवक से प्रेम हो गया। उसने उसका चित्र सखी चित्रलेखा से बनवाया। चित्रलेखा ने बताया की यह राजकुमार तो श्री कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध का है।

उषा-अनिरुद्ध मंदिर

बाद में दोनों ने ओखिमठ नामक स्थान(केदारनाथ के पास) विवाह किया जहां उषा-अनिरुद्ध नाम से एक मंदिर आज भी है। क्रोधित बाणासुर से अनिरुद्ध और उषा को कैद कर लिया। जब श्रीकृष्ण और बलराम को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने बाणासुर पर हमला कर दिया। भयंकर युद्ध हुआ। बाणासुर हारने लगा तो उसने मदद के लिये शिव जी का आह्वान किया। वचनबद्ध शिवजी श्री कृष्ण और उनकी सेना से युद्ध करने लगे। इस भयानक युद्ध से ब्रह्माण्ड खतरे में पड़ गया। सभी देवता मां दुर्गा के पास पहुंचे। माता ने सभी को शांत किया। बाद में अनिरुद्ध और उषा का विवाह हो गया।

इधर, बाणासुर को एक बार फिर अहंकार आ गया। उसे लगा कि शिव के साथ अब कृष्ण यानि भगवान विष्णु भी उसके साथ है। राजाओं के परामर्श से ऋषि-मुनियों ने यज्ञ किया। यज्ञ अग्नि से माँ पार्वती जी एक छोटी सी कुंवारी कन्या के रूप में प्रकट हुयीं और उन्होंने सभी क्षत्रिय राजाओं से वर मांगने को कहा। तब सभी राजाओं ने देवी माँ से बाणासुर से रक्षा की प्रार्थना की। माता जी ने सभी राजाओं-ऋषि मुनियों और देवताओं को बाणासुर से मुक्ति दिलाने का भरोसा दिलाया।

इसके बाद मां भारत के दक्षिणी छोर पर जा कर तपस्या में बैठ गयीं। दरअसल यह यह लीला बाणासुर को किले से दूर लाने की थी ताकि वह शिवजी से उसकी रक्षा नहीं कर सके। यहां वह बायण माता के नाम से जानी गई। आज भी उस जगह पर बायण माता को दक्षिण भारतीय लोगों द्वारा कुंवारी कन्या के नाम से पूजा जाता है और उस जगह का नाम भी कन्या कुमारी है।

जब पार्वती जी के अवतार देवी माँ बड़ी हुई तो उनकी सुन्दरता से मंत्रमुग्ध हो कर शिवजी उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा। विवाह की तैयारियां होने लगी। तभी नारद मुनि ने सोचा यह विवाह अनुचित है। बायण माता तो पवित्र कुंवारी देवी हैं जो पार्वती जी का अवतार होने के बावजूद उनसे भिन्न हैं, यदि उन्होंने विवाह किया तो वे बाणासुर का वध नहीं कर पाएंगी। बाणासुर केवल परम सात्विकदेवी के हाथो ही मृत्यु को प्राप्त हो सकता था।

तब नारद जी ने एक चाल चली। विवाह का मुहुर्त सूर्योदय से पूर्व था। शिवजी रात को कैलाश से बारात लेकर निकले थे। रास्ते में नारद मुनि मुर्गे का रूप धरा और जोर जोर से बोलने लगे। शिवजी को लगा की सूर्योदय होने वाला है और अब विवाह की घडी निकल चुकी है। अतः शिवजी विवाह स्थल से 8-10 किलोमीटर दूर ही रुक गए। उधर, देवी मां दक्षिण में त्रिवेणी स्थान पर शिवजी का इंतज़ार करती रह गयी। जब शिवजी नहीं आये तो माताजी क्रोद्धित हो गयीं। उन्होंने जीवन पर्यन्त सात्विक रहने का प्रण ले लिया।

बाणासुर को माताजी की माया का पता चला तब वह खुद माताजी से विवाह करने को आया किन्तु देवी माँ ने माना कर दिया। जिस पर बाणासुर क्रोधित हो उठा। उसने युद्ध के बल पर देवी माँ से विवाह करने की ठानी। जिसमे देवी माँ ने प्रचंड रूप धारण कर उसकी पूरी दैत्य सेना का नाश कर दिया और अपने चक्र से बाणासुर का सर काट के उसका वध कर दिया।

भादरिया माता को कुलदेवी के रूप में पूजते है ये

मृत्यु पूर्व बाणासुर ने परा-शक्ति के प्रारूप उस देवी से अपने जीवन भर के पापों के लिए क्षमा मांगी और मोक्ष की याचना करी जिस पर देवी माता ने उसकी आत्मा को मोक्ष प्रदान कर दिया। इस प्रकार देवी माँ को बाणासुर का वध करने की वजह से बायण माता, बाण माता या ब्रह्माणी माता के नाम से भी जाना जाता है।

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Haryana

समाज की ये बेटी सरकारी कर्मियों के लिये बनी मिसाल

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सैन समाज की यह एक बेटी उन तमाम सरकारी कर्मचारियों के लिये मिसाल है, जो नौकरी को केवल ड्यूटी मानते है। कोराना काल में इस बेटी ने एक साथ कई फर्ज निभाए। यह बेटी हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल है।

हरियाणा की सोनिया ओम डूलिया स्थानीय मीडिया की सुर्खियों में है। वह चंडीगढ़ निवासी है और हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल है। लोकडाउन के दौरान उनकी ड्यूटी मनमोहन नगर स्थित राधा स्वामी सत्संग भवन में बनाये गए आश्रय स्थल पर थी। 390 प्रवासी मजदूर यहां थे। इनमें कुछ मजदूरों के साथ बच्चे भी थें।

सोनिया ने एक दिन देखा कि ये बच्चे अपनी किताबों के पन्न फाड़कर उनके हवाई जहाज बनाकर खेल रहे थे। सोनिया ने बच्चों को किताबें फाड़ने से टोका तो वे बोले, ये अब काम की नहीं है। कोरोना के चलते उनकी पढ़ाई छूट गई है। बातचीत में पता चला कि ये बच्चे चौथी से छठीं क्लास में पढ़ते थें।

बच्चों का उत्तर सोनिया के लिये आश्चर्यजनक था। उसने तय किया कि बच्चे जब तक यहां है, वे उन्हें पढ़ाएगी। फिर क्या था, क्लास शुरू हुई। सोनिया के प्यार भरे व्यवहार ने बच्चों की सोच बदल दी। बच्चे पढ़ने लगे। पिछले दिनों ये बच्चे जब यहां से गए तो सोनिया भावुक हो उठी। बच्चे भी अपनी सोनिया दीदी को याद करते हुये यहां से गए। इन बच्चों की करीब महीने भर यहां पढ़ाई हुई। इस दौरान सोशल डिस्टेंसी का पूरा ध्यान रखा गया। यहां रहते हुई बच्चों की पढ़ाई उनके लिये काफी अहम रखेगी। दरअसल, सोनिया के प्रयास ने इन बच्चों के मन में पढ़ाई को लेकर आए नकारात्मक विचारों को बदला। उनमें पढ़ने की ललक फिर से पैदा की।

सोनिया की कर्तव्य परायणता दूसरे सरकाीर कर्मचारियों के लिये प्रेरणास्रोत है। सुरक्षा की नियमित ड्यूटी के साथ डूलिया ने एक शिक्षक और दीदी की भूमिका निभाई। सोनिया ने कंप्युटर साइंस में डिग्री ले रखी है। उनके पति ओम प्रकाश डूलिया का निजी व्यवसास है।

ना गांव में है इस गोत्र की कुलदेवी का प्राचीन मंदिर

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क्षौरकार संस्था ने किया कोरोना वॉरियर्स का सम्मान

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कोरोना योद्धाओं के काम को सलाम। संकट की इस घड़ी में ये योद्धा अपने काम से लोगों का दिल जीत रहे है। जोधपुर में सैन समाज क्षौरकार संस्था बासनी ने कोरोना वॉरियर्स का सम्मान किया।

जोधपुर। सैन समाज क्षौरकार संस्था बासनी द्वारा 80 कोरोना कर्मवीरों का सम्मान किया गया। तनावड़ा स्थित संस्था कार्यालय पर कोरोना महामारी के समय ड्यूटी कर रहे डॉक्टर, हॉस्पिटल कर्मचारी, पुलिसकर्मी, विद्युत कर्मी, पत्रकार इत्यादि कर्मवीरों का सम्मान किया गया। यह कार्यक्रम मंगलवार, 16 जून 2020 को संपन्न हुआ।

संस्था अध्यक्ष राम सा वीरा व उपाध्यक्ष रुपाराम ने बताया कि जगदीश भाटी, सुमेर खींची, मुन्ना लाल, पर्वत, देवीलाल, दाऊलाल, शिवलाल, अखिलेश पलाड़ा लैब टेक्नीशियन के मुख्य आतिथ्य में कार्यक्रम आयोजित हुआ। संस्थापक गणपत भाटी व मीडिया प्रभारी प्रवीण तनावड़ा ने बताया कि इस अवसर पर क्षौरकार संस्था जोधपुर द्वारा क्षौरकार भाइयों को पीपीई किट वितरित किए गए।

कोषाध्यक्ष कंवरलाल परिहार ने बताया कि जोधपुर के मथुरा दास माथुर हॉस्पिटल, उमेद हॉस्पिटल, एम्स हॉस्पिटल, मेडी प्लस हॉस्पिटल मे कोरोना महामारी के चलते ड्यूटी कर रहे हैं 50 कर्म वीरों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्वरूप, बांकाराम, मनोहर, मनोज, दिनेश, सुरेश, रमेश, गोविन्द, प्रदीप ,सुनील, निम्बेश, टीकम सैन, जितेंद्र, बाबुलाल, पप्पाराम, अशोक वीरा इत्यादि संस्था पदाधिकारी मौजूद रहे।

गलाना गांव में है इस गोत्र की कुलदेवी का प्राचीन मंदिर

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कुलदेवी

My Kuldevi3 weeks ago

श्रीबाण माता को कुलदेवी के रूप में पूजते है ये परिवार

श्री बाण माता का मुख्य मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है। ब्राह्मणी माता, बायण माता और बाणेश्वरी माता जी...

Feature11 months ago

जमवाय माता को सैन समाज के कई परिवार मानते है कुलदेवी

जमवाय माता भगवान राम के पुत्र कुश के वंश कछवाहा की कुलदेवी है। सैन समाज में कुछ परिवार ऐसे हैं...

Feature12 months ago

सैन समाज के कई परिवारों की कुलदेवी है जीण माता

जीण माता कई परिवार एवं गोत्रों की कुलदेवी है। सैन समाज में भी कई गोत्र ऐसे हैं जो जीण भवानी...

Feature1 year ago

गलाना गांव में है इस गोत्र की कुलदेवी का प्राचीन मंदिर

गलाना गांव में  प्राचीन मंदिर आस्था का केंद्र है। यह गांव कोटा में जिला मुख्यालय से करीब 18 किमी दूर...

Feature1 year ago

भादरिया माता को कुलदेवी के रूप में पूजते है ये

श्री भादरिया माता का मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र है। विभिन्न समाजों में कई परिवारों में माता को कुलदेवी...

Feature1 year ago

कुलदेवी के रूप में होती है ‘मां नागणेची’ की पूजा

कई परिवारों में कुलदेवी के रूप में मां नागणेची की पूजा की जाती है। मां नागणेची को नागणेच्या, चक्रेश्वरी, राठेश्वरी...

Feature1 year ago

इन गोत्रों में कुलदेवी की रूप में पूजी जाती सच्चियाय माता

सैन समाज के विभिन्न गोत्रों की कुलदेवी परिचय की श्रंखला में प्रस्तुत हैं सच्चियाय माता की जानकारी। सच्चियाय माता का...

Feature1 year ago

सैन समाज के इन गोत्रों के लिये खास है हजारों साल पुराना देवी का यह मंदिर

अर्बुदा देवी मंदिर को अधर देवी के नाम से भी जाना जाता है। मां अर्बुदा, मां कात्यायनी का ही रुप...

Feature1 year ago

नारायणी धाम: पानी कितने साल से आ रहा हैं, जानकार रह जायेंगे हैरान

नारायणी धाम पर कुंड से अटूट जलधारा का रहस्य आज भी कोई नहीं जान सका है। पानी की धार लगातार...

Feature1 year ago

कर्मावती कौन थीं और कैसे बन गई नारायणी, जानिये

विजयराय और रामहेती के घर एक बालिका जन्मी। नाम रखा गया कर्मावती। सयानी होने पर उनका विवाह करणेश जी के...

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