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सैन समाज के गोत्र

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Gotra List- Sain Samaj Gotra -Nai Samaj-Sen Samaj Gotra update

सैन समाज की गोत्र सूची देखने से पहले जानते है, गोत्र क्या है? गोत्र उन लोगों का समूह होता जिनका वंश एक पूर्वज से अटूट क्रम से जुड़ा है।

संतान की संतान और उसकी संतान, यह क्रम चलता रहता है। इसे कुल या वंश भी कहते है। गोत्र हमारी पहचान है। जानकार आश्चर्य होगा कि कुछ परिवारों का गोत्र हजारो वर्ष पहले पैदा हुए पूर्वज के नाम से आज भी चल रहा है। इसे यूं समझ सकते हैं भगवान राम के पुत्र कुश के वंशजों का गोत्र कुशवाह है। राजपूत समाज में यह गोत्र आज भी प्रमुख है।

नाई समाज की गोत्र सूची यहां दी जा रही है। इस सूची में यदि आपका गोत्र शामिल नहीं है, या इस सूची में शामिल नहीं हो सके किसी गोत्र की जानकारी आपको है, तो उसके बारे में जरूर बताये। आपकी इस मदद से सेन समाज की गोत्र सूची को अपडेट हो सकेगी। इस संबंध में आप सूचना हमारे WhatsApp पर या Email पर दे सकते है। अधिक जानकारी आप Sain India  के Contact us पर क्लिक करें। आपकी सूचना के आधार पर हम उसे गोत्र को इस सूची में शामिल करने का प्रयास करेंगे। साथ ही आपके अमूल्य सुझावों का हम सदा स्वागत करते है। इस सूची में शामिल गोत्रों की जानकारी विभिन्न स्रोतों से जुटाई गई है।

नाई समाज की गोत्र सूची

बाजवान

सैनीवाल

सेजवाल

मृदवाल
कामेवार

गोठरीवाल (Gothriwal)

लीमडींया चौहान

साचौरा चौहान

ढावरिया

खिरिया

डेरावरिया परिहार (Deravariya Parihar)

मडोरिया (Madoriya)

हरमपुरिया

धावानीवाल

काकेरवाल

दैया  (Daiya)

झागडा (Jhagda)

कुटनिया (Kutiniya)

मुणीया

सरोया (Sroya)

छोछलेन

छालीवाल

बापडोलिया

बांधोरिया

ढावरिया

लाखडा

बरिया

कौशिक  (Kaushik)

नरुका

सेमरीवार

बच्चस (Bachchas)

पचेरीवाला (Pacheriwala )

आशापुरी चौहान

धानिया

ससोनिया

टोकसिया

रिथालिया

अनछेरवाल

लाकड़ा
धंवर
सरोहा
सहल
मोरवाल
कमलभाटी
बालोदिया
सखवाया
मुथरिया
कमकेटर
धारिवाल
धान्धल
काकरान
रुदावलिया
मोरोठीया

डकोरिया
नागल
रानीवाल
मोहदोवरीया
कालीधाड़
ददेरिया
बडगुजर
रावलपोताकी
मिर्द्वाल
कैतोदिया
चौहान
गोमला
राठौड़
मिलोनिया

कन्नाजिया (Kannaujiya)

परमार

दिनोदया
छोछलेण
जसकल्याण
नागवान
ढोकवाल

रे़वाडीया
कचरा
छोंकर
सुहल
रसवाल
चितोरिया
तुन्द्वाल

मातवाल
जायसवाल
छिछोलिया
तोनगरिया
राजोरीया
मथाणा
जायलवाल
कालोया तंवर
ढ्णेठिया
कांकरवाल
रॉय
मोहिल

कालोरिया
मेगारिया
जोलानिया
चित्तौडिया
लाम्भा
रणवीर
मावतवाल
झाकडा
चितौसिया
वरेनिया
रामगुदेनिया
मौयला
झांझीरिया
चितोरिया
तुन्द्वाल
राक्षसिया

राकस्या चौहान
मातवाल
जायसवाल
छिछोलिया
तोनगरिया
राजोरीया
मथाणा
जायलवाल
चायल
तोणगरिया
राजोरा
मारवाल
जसांरिया

छापरवाल
तोमर
राजोरा
मारोठिया
जसाईवाल
चांगल
टोकसिया परिहार
रजलीवाल
मालीयां
जनोतरिया
छ्लेछरिया
टोकसिया पडियार
पूरबगोला
मंगरोलिया
जामडीवाल
बुगानिया
तिराडिया
पिचोनिया
मंगोरे पंवार
जलवानिया
बिस्पतिया
तिमोली
फुलमाली
मंगोडीया
जाखोरीया
बिलखीवाल
ठणवाल
फुलडालिया
मण्डोरिया

जाखड
भूराभाटी
थैमानिया
फुलभाटी
मंडोरा परिहार
जाजायां
भोलानिया
तेनोरिया
पाटोदिया
मण्डावरिया
जाजम
भिर्दवाल
तस्सीवार
पंवार
मामूनिया
जैसाभाटी
भाटलिया
तंवर
पणी
मामोडिया
जगीयोटिया
भाटिया
तमोली
पनौरिया
मालोनिया
जगाभाटी
भाटी पोड

भूरा भाटी

झिझ भाटी
टांक
पहाडीवाल
माली
जादम
भाटी

सुरंग
पचेवरिया
मकवाना
जालवा
भारद्वाज
सुनारी
पचेरीया
मकाणा
इंदोरिया
भरतवाल
सुलोदिया
ओमरे
मजेरिया
इकुवार
बेगनिया
सोनगरा

ओजणा निर्वाण
महरुनिया
हुरमपुरिया
बीजासणी
सोमावत
ओझरया निर्वाण
म्हार खुर्द
रानीवाल
हथलिया पंवार
बावलिया
सोलिवाल
लूनीवाल
महाजन
हर्षवाल
बसीर
सोलंकी
नोहवार
मगोडरिया
हांतरीया
बांगर
सोगरिया
नीवोरिया

माण्डका
गुजराती
बांगडदीया
सिवानिवाल
निर्वाण
लिलडिया
गुधेनिया
बन्दाबडया
सितारिया
निमराण्या
कुकडेला
गोठडिया
बजहेरिया
सिसोदिया
निमराना
किरोडीवाल
गोगाणी चौहान
बागोरिया
सिरोदिया
नीमपोरमथुरिया
खुवाल
गंगवाल
बागरी

मथुरिया

सीन्दराडा
निम्बोरिया
खुरदरा
गहलोत
बागान
सिणोलिया
निबोरिया
खुडानिया बैणभरु
भणभैरू
गदाईवाल
बडेखण्या
सिकरवार
नीबोरिया

खिंची
ईनणीया
बडबडिया
सिहरमुखिया
नरवल
खेडिया
डूंखवाल
बदावडीया
सिधमुखिया
नारोलिया
खटोर
दुलकोटिया
बाचवली
श्यामडीवाल
नारोडया
खासपुरिया
डुकवाल
बाछल
श्रीवास

नारनोलिया
खारवाल
दुहारिया
आमेरिया
शकवाया
नरेडिया
खण्डेलवाल
दिनोदिया
आमेरी
सेंतरिया
नरण्डया
कौशल
डीडवानियां
अजमेरिया
सांखला
ननारसा
कतन्या चौहान
ढोरु
अजमेरा

सामडीवाल
नालावत
कटकरीया
ढोर
आमेरिया
अजमेरिया
अजाडीवाल
सांभरीया
नखलीया
कथूरिया
ढेणवाल
आवल्या
सांभरिया
नखाली
करोरीवाल
धवरिया
आसोदिया
सांभरी
नैनारस्या
कारोलिया
धारीयां
सामरियाचौहान
नगरियान
करकडिया

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24 Comments

24 Comments

  1. Kushal raj

    May 24, 2019 at 9:05 AM

    Nice subject

    • सैन इंडिया टीम

      August 12, 2019 at 12:27 PM

      धन्यवाद

  2. Yogesh Rajliwal

    June 19, 2019 at 4:10 PM

    I’m surprised there are so many ultrasound in our nai samaj around 285. You have gathered a quite good amount of information about our Nai Samantha. Thank you very much

  3. N.k.chouhan

    June 21, 2019 at 9:08 PM

    Main main Gujarati e e Sen samaj se hoon Merpa gotra ashapuri Chauhan hai

    • सैन इंडिया टीम

      August 12, 2019 at 12:28 PM

      जानकारी के लिये धन्यवाद। इसे अपडेट कर दिया गया है।

  4. हिमांशु ठाकुर

    June 30, 2019 at 10:21 AM

    भण भैरू सैन समाज

  5. MANISH KUMAR UMARE

    July 12, 2019 at 4:23 PM

    बहुत ही प्रशंसनीय कार्य मेरी ओर से अनेकों शुभ कामनायें | मनीषकुमार उमरे, बुरहानपुर(म.प्र.)

  6. Manohar Lal

    July 16, 2019 at 11:50 AM

    Dhaniya gotra nahi likha h isame
    GURUGRAM KE SOHNA & NAI NAGALA VILLAGE me SARE GHAR isi Gotra ke h

  7. Omparkash

    July 24, 2019 at 7:21 AM

    Rithalia

  8. Ravinder kumar encherwal

    July 26, 2019 at 3:19 PM

    Is suchi main encherwal gotre nahi hai

    • सैन इंडिया टीम

      August 12, 2019 at 12:29 PM

      जानकारी के लिये धन्यवाद। इसे अपडेट कर दिया गया है।

  9. Ankit thakur

    August 11, 2019 at 11:05 PM

    Mera gotra pacheriwala hai Maine Sab pura pada hai Isme Mera gotra Nahin Hai

    • सैन इंडिया टीम

      August 12, 2019 at 12:27 PM

      जानकारी के लिये धन्यवाद। इसे अपडेट कर दिया गया है।

    • Sonu kumar

      August 13, 2019 at 3:09 PM

      Sir This is sonu kumarsain from ferozepur kalan faridabad.sir my gotra is Bachchas,pls update my gotra.

  10. Bhudev rajoriya

    August 12, 2019 at 11:01 AM

    सैमरीवार तथा नरीसैमरी एक ही है या अलग कृपया बताने का कष्ट करें।

  11. Babu sain

    August 14, 2019 at 3:55 AM

    Hamara ढावरिया गोत्र है

    • सैन इंडिया टीम

      October 2, 2019 at 1:57 PM

      thanks for information

  12. Harish Kumar

    October 1, 2019 at 6:39 PM

    Please update Sejwal also. Humayunpur, Chirag Delhi in South-Delhi

    • सैन इंडिया टीम

      October 2, 2019 at 1:57 PM

      thanks for information

      • Balwant Sain Dhawariya

        June 4, 2020 at 3:02 PM

        धवारिया Dhawariya गौत्र है जी हमारा

  13. bablu parihar

    November 30, 2019 at 1:07 AM

    Me rajasthan se hu sir Jai sain ji maharaj…. Hmari gotr “deravariya parihar”hai iss list me nhi hai

    • सैन इंडिया टीम

      April 13, 2020 at 3:39 PM

      thanks for information

  14. Pardeep gothy

    February 15, 2020 at 6:21 PM

    Ek gotr nhi h…..”Gothriwal”..👈😒

    • सैन इंडिया टीम

      April 13, 2020 at 3:34 PM

      thanks
      Gothriwal gotra add in list

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जमवाय माता को सैन समाज के कई परिवार मानते है कुलदेवी

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जमवाय माता भगवान राम के पुत्र कुश के वंश कछवाहा की कुलदेवी है। सैन समाज में कुछ परिवार ऐसे हैं जो जमवाय माता को कुलदेवी के रूप में पूजते है।

अयोध्या के राम जन्म भूमि प्रकरण में श्रीराम के वंशज का मामला देशभर में चर्चित है। जयपुर के पूर्व राजघराने की ओर से श्रीराम का वंशज होने का दावा गया गया है। एमपी और पूर्व राजपरिवार की सदस्य दीया कुमारी ने पोथीखाना में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि जयपुर राजपरिवार की गद्दी भगवान राम के पुत्र कुश के वंशजों की है। भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज होने से ढूंढाड़ के राजा कछवाहा कहलाने के साथ राम की 309वीं पीढ़ी में मानते हैं।

यह जानकारी का उल्लेख इसलिये किया गया है कि जमवाय माता मुख्यत: कछवाहा वंश की कुलदेवी है। आज भी राजपरिवार के सदस्य यहां ढोंक लगाने जाते है। ऐसा नहीं है कि जमवाय माता केवल कछवाहा वंश की कुलदेवी है। दूसरी जातियों में कई परिवार ऐसे हैं जो माता को कुलदेवी के रूप में पूजते है। सैन समाज में भी कई परिवार ऐसे हैं जो जमवाय माता को कुलदेवी मानते है। खासकर जयपुर, दौसा, अलवर में रहने वाले सैन समाज के कई परिवारों कुलदेवी जमवा माता या जमवाय  माता है। जयपुर निवासी महेश कुमार सैन ने बताया कि उनका गोत्र आमेरिया अजमेरिया है। उनके परिवार में  माता को कुलदेवी के रूप में पूजते है।

जमवाय माता का मंदिर कहां है

जमवाय माता का मंदिर जयपुर शहर से करीब 55 किमी दूर है। मंदिर जयपुर कई साल तक प्यास बुझाने वाले जमवा रामगढ़ बांध से मात्र एक​ किलोमीटर दूर है। आसपास पहाड़ियां है और यह जमवा रामगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में आता है। बारिश के दिनों में यहां आसपास झरने बहते है। इन दिनों यहां गोठ और पिकनिक के आयोजन होते है। यहां तक पहुंचने के जयपुर से प्राइवेट और सरकारी बसें उपलब्ध है। जयपुर से नारायणी धाम, अलवर का एक रास्ता भी जमवा माता मंदिर होकर जाता है। नारायणी धाम के लिये जयपुर से पैदल परिक्रमा का पड़ाव भी यहां होता है। नवरात्रों में यहां दर्शनार्थियों की संख्या ज्यादा रहती है।

जमवाय माता की कथा

जयपुर के नजदीक यह इलाका पहले मांच के नाम से जाना जाता था। एक बार राजा दूल्हाराय ने मांच पर हमला कर मीणों से युद्ध किया। इस युद्ध में वे हार गये और रणभूमि में मूर्छित हो कर गिर पड़े। रात में बुढवाय देवी रणभूमि में आई और दूल्हाराय के सिर पर हाथ फेरा। उनकी मूर्छा टूटी तो माता ने खुद को जमवाय नाम से पूजने और मन्दिर बनवाने का वचन मांगा। दूल्हाराय ने मां को वचन पूरा करने का भरोसा दिलाया। उनकी सेना ​जीवित हो गई और फिर उन्होंने मांच पर हमला बोला। इसमें उनकी जीत हुई। इसके बाद ये मंदिर बनवाया।

यहां के बारे में एक और घटना का भी जिक्र मिलता है। राजा कांकील भी मीणों के साथ युद्ध करते हुए सेना के साथ मूर्छित होकर रणक्षेत्र में गिर पड़े। तब भी जमुवाय माता सफेद धेनु (गाय) के रूप में प्रकट हुई। उन्होंने दूध की वर्षा कर पूरी सेना को जीवित कर दिया। माता ने शत्रु पर विजय प्राप्त कर आमेर बसाने की आदेश दिया।

माता के मन्दिर के गर्भगृह में माता की प्रतिमा के दाहिनी तरफ धेनु एवं बछड़े व बायीं ओर बुढ़वाय माता की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर परिसर में शिवालय एवं भैंरव का स्थान भी है। राजा ने अपने आराध्य देव रामचंद्र एवं कुलदेवी जमुवाय के नाम पर मांच का नाम जमुवाय रामगढ़ रखा गया। जो बाद मे जमुवा रामगढ़ के रूप में जाना जाने लगा।

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सैन समाज के कई परिवारों की कुलदेवी है जीण माता

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जीण माता कई परिवार एवं गोत्रों की कुलदेवी है। सैन समाज में भी कई गोत्र ऐसे हैं जो जीण भवानी को कुलदेवी मानते है। जीण माता मां दुर्गा का रूप है।

जीण माता के दरबार में गोपाल मारवाड़ी और उनकी पत्नी

महाराष्ट्र से सैन समाज के गोपाल मारवाड़ी ने जानकारी दी है कि उनका गोत्र जलवानी है। जलवानी गोत्र के कई परिवार कुलदेवी के रूप में जीण माता को पूजते है। रवि चांगिल के अनुसार, उनके भी परिवार में कुलदेवी के रूप में जीण माता को पूजा जाता है। जीण माता के यूं तो देशभर में कई मंदिर है। प्राचीन और असली मंदिर राजस्थान में है। सीकर में गोरिया से कुछ किमी दूर यह भव्य एवं प्राचीन मंदिर स्थित है।

जयपुर से जीण माता की दूरी तकरीबन 115 किमी है। जबकि प्रसिद्ध खाटू धाम से माता का मंदिर 27 किमी. है। जीण माता से सालासर धाम की दूरी करीब 75​ किमी. है। खाटू श्याम जी, जीण माता और सालासर बालाजी के प्रति गहरी धार्मिक आस्था है। इसी वजह से यहां हर दिन भक्त पहुंचते है। मेेले के मौके पर यहां लाखों भक्त पहुंचते है। जीण माता के मंदिर को लेकर एक मान्यता यह भी है कि यह मंदिर पांडवों ने बनाया था। अज्ञातवास का कुछ समय पांडवों ने यहां बिताया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार, यह मंदिर करीब 1000 साल पुराना है।

माता के चमत्कार की कई कहानियां है। मुगल शासक औरंगजेब ने इस मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया। उसने अपनी सेना यहां भेज दी।  तभी मधुमक्खियों के झुंड ने मुगल सेना पर हमला बोल दिया। सेना को पीछे हटना पड़ा। इतना ही नहीं औरंगजेब भी बीमार पड़ गया। बाद में उसने माता के दरबार में अखंड जोत जलवाने की व्यवस्था का भरोसा दिलवाया, तब वह ठीक हुआ। उसके समय इस परम्परा का निर्वाह हुआ।

जीण माता की कहानी

जीण माता का असली नाम जयंतीमाला था। जीण अपने भाई हर्ष से बेहद प्रेम करती थी। एक बार जीण और उसकी भाभी के बीच बहस छिड़ गई कि हर्ष उनमें से किसको ज्यादा चाहते है। इसकी परीक्षा के लिये उन्होंने तय किया पानी लाते समय हर्ष सबसे पहले जिसके सिर से घड़ा उतारेंगे, उससे ज्यादा प्रेम करते है। दोनों पानी से भरा घड़ा लेकर घर पहुंचती है। दोनों के बीच विवाद से अनजान हर्ष सबसे पहले अपनी पत्नी के सिर से घड़ा उतारते है। यह देखकर जीण को गुस्सा आ जाता है और सब कुछ छोड़कर काजल पर्वत पहुंच जाती है और वहां देवी तपस्या करने लगती है। हर्ष को जब पूरी बात पता चलती है तो दुख होता है। वह जीण को मनाने जाते है लेकिन, जीण अपनी तपस्या तोड़ने को राजी नहीं होती। ऐसे में हर्ष भी पर्वत पर जाकर भैंरों की तपस्या करने लगते है। जीण माता को देवी रूप और हर्ष को भैंरों पद प्राप्त होता है।

सम्मान पा कर अभिभूत हुये बुजुर्ग और प्रतिभाएं

जीण माता के भक्त

जीण माता के प्रति भक्तों में अगाध श्रद्धा है। माता के भक्त पूरे राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात समेत देश के अधिकांश राज्यों में है। विदेशों में भी माता के भक्त हैं। राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य, नाई (सैन) आदि समाजों में कई गोत्र ऐसे हैं जो माता को कुलदेवी के रूप में पूजते है। जात जड़ूले माता के दरबार में करते है। चैत्र और ​अश्विनी मास के नवरात्रों में यहां आस्था का सैलाब उमड़ता है। जीण माता के भजन, जीण माता की आरती, जीण माता चालीसा से भक्त माता को रिझाते है।

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गलाना गांव में है इस गोत्र की कुलदेवी का प्राचीन मंदिर

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गलाना गांव में  प्राचीन मंदिर आस्था का केंद्र है। यह गांव कोटा में जिला मुख्यालय से करीब 18 किमी दूर स्थित है।

कुलदेवी बांगड़दिया

गलाना गांव लाड़पुरा तहसील में आता है। सांगोद रोड़ पर स्थित इस गांव में बांगड़दिया सती माता का प्राचीन मंदिर है। सैन समाज में बांगडदिया परिवार इस माता को कुलदेवी के रूप में पूजते है। महावीर सैन बांगड़दिया ने इस बारे में जानकारी दी। कुलदेवी बांगड़दिया सेन विकास समिति के प्रधान महासचिव जगदीश प्रसाद सैन ने बताया कि यह मंदिर सैकड़ों साल प्राचीन है। इसका प्रमाण यहां उपलब्ध शिलालेख है। हालांकि इस शिलालेख पर क्या अंकित है, इसको जानने का प्रयास किया जा रहा है।

जानकारी के अभाव में पहले यहां बहुत कम लोग जा पाते थे। अब इसका प्रचार प्रसार किया जा रहा है ताकि नई पीढ़ी को इस मंदिर के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके। यहां कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते है। सैन समाज के गोत्र बांगड़दिया के अधिकांश परिवार राजस्थान के हाडौती अंचल में है। कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां जिले हाड़ौती में आते है।

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भादरिया माता को कुलदेवी के रूप में पूजते है ये

अचलानंद महाराज से मिला पुणे सैन समाज का प्रतिनिधिमंडल

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कुलदेवी

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