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कर्पुरी ठाकुर को भारत रत्न मिले, मांग को लेकर दिल्ली में जुटा सैन समाज

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देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से कर्पुरी ठाकुर को सम्मानित करने की मांग उठ रही है। नाई समाज के लिये गौरव कर्पुरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिये, इस मांग को लेकर देशभर से सैन समाज के लोग नई दिल्ली में जुटे।

कर्पुरी ठाकुर

नई दिल्ली में बुधवार, 26 जून को सैन समाज के विभिन्न संगठनों की ओर से धरना दिया गया और केंद्र सरकार से जननायक कर्पुरी ठाकुर को भारत रत्न देने की अपील की है। इस धरने का आयोजन समस्त सैन, सविता, नंद, श्रीवास समाज की ओर से किया गया। इस धरने में देशभर से आये समाज के लोग शामिल हुए। वक्ताओं ने एक स्वर में जननायक कर्पुरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कर्पुरी ठाकुर के योगदान का भुलाया नहीं जा सकता है। वक्ताओं ने आरक्षण में कर्पुरी ठाकुर फार्मुला पूरे देश में लागू करने की भी मांग की।

100 से ज्यादा संगठनों की मांग है

वैसे कर्पुरी ठाकुर को भारत रत्न मिलना चाहिये, यह मांग केवल नाई समाज की ही नहीं है। बिहार में 100 से ज्यादा सामाजिक और जातिगत संगठन इस जननायक को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग कर रहे हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी भी शामिल है। यह मांग लंबे समय से की जा रही है। दरअसल, कर्पूरी ठाकुर की पहचान अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के बड़े नेता के रूप में बनना है। बीबीसी की ए​क रिपोर्ट के अनुसार, कम आबादी विभिन्न जातियों के समूह ईबीसी में 100 से ज़्यादा जातियां शामिल हैं।

लोकप्रियता के कारण उन्हें जननायक कहा जाता है

कर्पुरी ठाकुर स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, राजनीतिज्ञ तथा बिहार राज्य के दूसरे उपमुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनकी सहजता और लोकप्रियता के कारण उन्हें जननायक कहा जाता है।

कर्पूरी ठाकुर का जन्म समस्तीपुर के एक गाँव पितौंझिया, जिसे अब कर्पूरीग्राम कहा जाता है, में हुआ था। इनके पिताजी का नाम गोकुल ठाकुर तथा माता का नाम रामदुलारी देवी था। इनके पिता गांव के सीमांत किसान थे तथा अपने पारंपरिक पेशा नाई का काम करते थे। भारत छोड़ो आन्दोलन के समय उन्होंने 26 महीने जेल में बिताए थे। वह 22 दिसंबर 1970 से 2 जून 1971 तथा 24 जून 1977 से 21 अप्रैल 1979 के दौरान दो बार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर रहे।

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  1. Tejpal Sain

    June 27, 2019 at 8:09 AM

    Kappuri Thakur Amer rahe

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MP मीनाक्षी लेखी को लेकर दूर कर लें ये भ्रम

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दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद मीनाक्षी लेखी को लेकर सैन समाज में पिछले कई दिन से जबरदस्त भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इस भ्रम के चलते काफी बहस भी समाज के ग्रुप में हो चुकी है।

विवाद यह है कि ​सांसद मीनाक्षी लेखी सैन समाज से है या नहीं। इसको लेकर काफी बहस छिड़ी। उनके सैन समाज से होने को चले इस विवाद के बीच सैन इंडिया डॉट काम ने भी मिनाक्षी लेखी के ट्विटर पर मैसेज छोड़ा, हालांकि उनका इस पर कोई प्रत्युत्तर नहीं मिला। लेकिन,अखिल भारतीय सैन सविता समाज के अध्यक्ष सैन सुरेंद्र बदलिया ने पूरी स्थिति को स्पष्ट किया। उनका कहना है कि वे पंजाबी खन्ना है। उन्होंने मीनाक्षी  लेखी को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा करने वाली तमाम पोस्टों में सुधार के लिये सैन समाज से अपील की है। सैन इंडिया टीम इस भ्रम को समाप्त करने के लिये बदलिया की आभारी है।

क्यों बनी ये भ्रम की स्थिति

सांसद मीनाक्षी लेखी के सैन होने को लेकर पड़ताल में सामने आया कि यह भ्रम की स्थित एक वायरल वीडियो के कारण बनी। यह वीडियो 16 सितंबर 2018 को दिल्ली में अखिल भारतीय सैन सविता समाज के एक कार्यक्रम का है। आयोजकों ने लोकप्रिय जननेता होने की वजह से सांसद मीनाक्षी लेखी और मनोज तिवारी को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया था। किसी कारणवश तिवारी कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके।

उधर, इस कार्यक्रम के दौरान दिये भाषण में लेखी ने वहां अपने रिश्तेदार मौजूद होने की बात कही। जिससे यह मान लिया वह सैन समाज से है। असल में उनका इशारा कार्यक्रम में मौजूद पंजाबी रिश्तेदारों से था। इस वायरल वीडियो में उनके नाम के आगे सैन जोड़ दिया गया, जिससे  भ्रम की स्थिति बन गई।

कौन है मिनाक्षी लेखी

मीनाक्षी लेखी का जन्म 30 अप्रैल 1967 को नई दिल्ली में हुआ था। उन्होंने प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में बीएससी किया है। बाद में, उन्होंने एलएलबी किया। डीयू से उन्होंने 1990 में दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकरण करवाया। उनके ससुर स्वर्गीय प्राण नाथ लेखी सुप्रीम कोर्ट के जानेमानें वकील थे। उनका विवाह अमान लेखी के साथ 11 अप्रैल 1992 को हुआ। उनके तीन संतान है।
जानकारी के अनुसार, मीनाक्षी लेखी आरएसएस से जुड़े संगठन, स्वदेशी जागरण मंच के साथ काम कर रही थीं। उस दौरान उनकी मुलाकात पूर्व भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी से हुई। लेखी के व्यक्तित्व और काम करने के तरीके को देखकर गडकरी ने उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए कहा। मीनाक्षी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और भाजपा की महिला मोर्चा (महिला विंग) में शामिल हो गई। जल्द ही वे बीजेपी महिला मोर्चा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बन गईं।
वर्तमान में वे नई दिल्ली से भाजपा सांसद है। उन्होंने यहां से कांग्रेस के अजय माकन को हराया है। मीनाक्षी ने यह सीट 256504 वोटों से जीती है। वे इस सीट से लगातार दूसरी बार चुनाव जीती है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने अजय माकन को ही हराया था।

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मीनाक्षी फिर जीती चुनाव, माकन को​ करारी शिकस्त दी

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मीनाक्षी लेखी नई दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव जीत चुकी है। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन को​ करारी शिकस्त दी है।

 नई दिल्ली लोकसभा सीट त्रिकोणात्मक मुकाबले में फंसी हुई थी। यहां से कांग्रेस के अजय माकन और आम आदमी पार्टी के बृजेश गोयल उन्हें चुनौती दे रहे थें। मीनाक्षी ने यह सीट 256504 वोटों से जीती है। वे इस सीट से लगातार दूसरी बार चुनाव जीती है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने अजय माकन को ही हराया था।

नई दिल्ली लोकसभा को दिग्‍गजों की सीट कहा जाता है। यह सीट हमेशा भाजपा और कांग्रेस के हाथों में रही है। यहां से अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गज सांसद रह चुके हैं। 2004 और 2009 में जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार थी तब नई दिल्ली ने माकन को अपना जनप्रतिनिधि चुना था। 2009 में भी माकन जीते। उन्होंने भाजपा के विजय गोयल को 1,87,809 वोटों से हराया था। उससे पहले माकन ने ही 2004 में भाजपा के जगमोहन को 12,784 वोटों से शिकस्त दी थी।

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सैन मीनाक्षी लेखी के बारे में अहम जानकारी

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नई दिल्ली लोकसभा सीट से भाजपा की उम्मीदवार मीनाक्षी लेखी ने जीत हासिल की है। मीनाक्षी लेखी सैन समाज से है। जानियें कौन है मीनाक्षी लेखी।

मीनाक्षी लेखी नई दिल्ली सीट से लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीती है। मीनाक्षी लेखी को जुझारू और बहुमुखी चेहरे के रूप में जाना जाता है। इसलिये ही वे भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रही है। वे सुप्रीम कोर्ट की वकील हैं।

लेखी साप्ताहिक पत्रिका, ‘फोर्थराइट’ में एक पाक्षिक कॉलम लिखती है। उन्होंने टेलीविज़न शो और समाचार पत्रों में विभिन्न लेखों में कई मुद्दों पर बहस की है। वे विभिन्न मंत्रालयों के साथ एनएचआरसी और लिंग प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विभिन्न व्याख्यान ले रही है। वे “महिला आरक्षण विधेयक” और “कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की समस्या” की मसौदा समिति का सदस्य भी रही है। 2014 में वे प्रेस कौंसिल आफ इंडिया की मेंबर रह चुकी हैं।

जीवन परिचय

मीनाक्षी लेखी का जन्म 30 अप्रैल 1967 को नई दिल्ली में हुआ था। उन्होंने प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में बीएससी किया है। बाद में, उन्होंने एलएलबी किया। डीयू से उन्होंने 1990 में दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकरण करवाया। उनके ससुर स्वर्गीय प्राण नाथ लेखी सुप्रीम कोर्ट के जानेमानें वकील थे। उनका विवाह अमान लेखी के साथ 11 अप्रैल 1992 को हुआ। उनके तीन संतान है।

गडकरी के कहने पर भाजपा ज्वाइन की

जानकारी के अनुसार, मीनाक्षी लेखी आरएसएस से जुड़े संगठन, स्वदेशी जागरण मंच के साथ काम कर रही थीं। उस दौरान उनकी मुलाकात पूर्व भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी से हुई। लेखी के व्यक्तित्व और काम करने के तरीके को देखकर गडकरी ने उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए कहा। मीनाक्षी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और भाजपा की महिला मोर्चा (महिला विंग) में शामिल हो गई। जल्द ही वे बीजेपी महिला मोर्चा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बन गईं।

सैन समाज से होने पर सवाल

हालांकि समाज का एक तबका मानता है कि मीनाक्षी लेखी सैन समाज से नहीं है। वह पंजाबी खन्ना है। जबकि पिछले दिनों वे सैन समाज के विभिन्न कार्यक्रमों में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुई है। उस दौरान दिये गए भाषणों में उन्होंने सैन समाज के लिये हर संभव मदद का भरोसा दिलाया था।

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